डॉ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मौलिक रूप से साहित्यिक विधा के व्यक्ति हैं। अब तक हिन्दी साहित्य की तमाम विधाओं (कविता, उपन्यास, खण्ड काव्य, लघु कहानी, यात्रा सहित आदि) में प्रकाशित उनकी कृतियों ने उन्हें हिन्दी साहित्य में सम्मानजनकर स्थान दिलाया है। राष्ट्रवाद की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी हुई है। यही कारण है कि उनका नाम राष्ट्रकवियों की श्रेणी में शामिल है। डॉ0 ‘निशंक’ की प्रथम रचना कविता संग्रह समर्पण का प्रकाशन 1983 में हुआ था। तब से अब तक उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज भी तमाम व्यस्तताओं के बावजदू उनका लेखन जारी है। यह डॉ0 ‘निशंक’ के साहित्य की प्रासंगिकता और मौलिकता है कि अब तक उनके साहित्य को विश्व की कई भाषाओं (जर्मन, अंग्रेजी, फ्रैंच, तेलुगु, मलयालम, मराठी आदि) में अनूदित किया जा चुका है।

इसके अलावा इनके साहित्य को मद्रास, चेन्नई तथा हैंबर्ग विश्वविद्यालय के पाठय्क्रम में शामिल किया गया है। उनके साहित्य पर अब तक शिक्षाविद् (डॉ0 श्यामधर तिवारी, डॉ0 विनय डबराल, डॉ0 नगेन्द्र, डॉ0 सविता मोहन, डॉ0 नन्द किशोर और डॉ0 सुधाकर तिवारी) शोध कार्य तथा पी.एचड़ी रिपोर्ट लिख चुके हैं। अब भी डॉ0 ‘निशंक’ के साहित्य पर कई राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों (गढ़वाल विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, हैंबर्ग विश्वविद्यालय जर्मनी, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा मेरठ विश्वविद्यालय) में शोध कार्य जारी है।


‘निशंक’ की प्रथम कृति ‘समर्पण’ (कविता संग्रह) वर्ष 1983 में प्रकाशित हुआ था। । अब तक आपके 10 कविता संग्रह, 12 कहानी संग्रह, 10 उपन्यास, 2 पर्यटन ग्रन्थ, 6 बाल साहित्य, 2 व्यक्तित्व विकास सहित कुल 4 दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं आज भी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद उनका लेखन जारी है।

‘निशंक’ की प्रकाशित कृतियां निम्न हैः-

कविता संग्रह

  • समर्पण
  • नवांकुर
  • मुझे विधाता बनना है
  • तुम भी मेरे साथ चलो
  • देश हम जलने न देंगे
  • जीवन पथ में
  • मातृभूमि के लिए
  • कोई मुश्किल नहीं
  • ऐ वतन तेरे लिए
  • संघर्ष जारी है

कहानी संग्रह

  • क्या नहीं हो सकता
  • भीड़ साक्षी है
  • बस एक ही इच्छा
  • रौशनी की एक किरण
  • खड़े हुए प्रश्न
  • विपदा जीवित है
  • एक और कहानी
  • मेरे संकल्प
  • मिल के पत्थर
  • टूटते दायरे

उपन्यास

  • मेजर निराला
  • बीरा
  • निशांत
  • छूट गया पड़ाव
  • अपना पराया
  • पहाड़ से ऊँचा
  • पल्लवी
  • प्रतिज्ञा
  • भागोवाली
  • कृतघन
  • शिखरों के संघर्ष

व्यक्तित्व विकास

  • सफलता के अचूक मंत्र
  • भाग्य पर नहीं परिश्रम पर विश्वास करें
  • संसार कायरो ले लिए नहीं
  • सपने जो सोने न दें

बाल साहित्य

  • आओ सीखे कहानियों से
  • स्वामी विवेकानद जीवन माला

खंडकाव्य

  • प्रतिज्ञा

पर्यटन

  • (धरती का स्वर्ग उत्तराखंड भाग - 1) हिमालय का महाकुम्भ नंदा राजजात
  • (धरती का स्वर्ग उत्तराखंड भाग - 2 ) स्पर्श गंगा ( उत्तराखंड की पावन जलधारायें )
  • (धरती का स्वर्ग उत्तराखंड भाग - 2 ) अलौकिक सौंदर्य (उत्तराखंड के नैसग्रिक स्थल )

संस्कृति

  • भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं परम्परा
  • विश्व धरोहर गंगा (गंगा एवं उत्तराखंड की पवन नदियाँ )

डायरी/संस्मरण/यात्रा वर्तान्त

  • मेरी कथा मेरी व्यथा
  • मारिसस की स्वर्णिम स्मृतियाँ
  • प्रलय के बीच

 

विश्व धरोहर गंगा (गंगा एवं उत्तराखंड की पावन नदियाँ )
भागोंवाली
प्रलय के बीच - केदारनाथ त्रासदी
सपने जो सोने न दें

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